संविधान प्रारूप

प्रारूप (Draft) — विचार हेतु। यह संविधान का प्रस्तावित प्रारूप है, अभी स्वीकृत नहीं। आम सभा, 25 अक्टूबर 2026 में चर्चा एवं अनुमोदन हेतु। [सुझाव] चिह्नित बिंदुओं पर निर्णय सभा करेगी।

श्री दुर्गा शक्ति पीठ संस्थान, अहिल्यापुर, देवरिया

संशोधित विधान (नियमावली) — प्रारूप

पढ़ने के लिए निर्देश: यह चर्चा हेतु प्रारूप है। जहाँ भी [सुझाव] लिखा है, वह संख्या, राशि, अवधि या व्यवस्था एक प्रस्ताव है — समिति/साधारण सभा उसे बदल सकती है। अंतिम रूप देने से पहले रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज़ एवं चिट्स (उ.प्र.) के नियमों से तथा किसी अधिवक्ता/चार्टर्ड एकाउंटेंट से मिलान कर लें।


धारा 1 — नाम, पता एवं कार्यक्षेत्र

  1. संस्थान का नाम “श्री दुर्गा शक्ति पीठ संस्थान” होगा, जिसे आगे “संस्थान” कहा गया है।
  2. पंजीकृत कार्यालय: श्री दुर्गा शक्ति पीठ मन्दिर परिसर, अहिल्यापुर, जनपद देवरिया (उ.प्र.)।
  3. संस्थान सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के अन्तर्गत पंजीकृत रहेगा। [सुझाव: पंजीकरण संख्या व तिथि यहाँ लिखें]

धारा 2 — उद्देश्य

  1. श्री दुर्गा शक्ति पीठ मन्दिर एवं परिसर के सभी मन्दिरों में नित्य पूजा, भोग, आरती, दीप एवं धार्मिक परम्पराओं का निर्बाध संचालन।
  2. नवरात्रि, मेला, भण्डारा एवं अन्य धार्मिक उत्सवों का आयोजन।
  3. मन्दिर परिसर का निर्माण, रख-रखाव, स्वच्छता एवं सुरक्षा।
  4. श्रद्धालुओं एवं आगन्तुकों के लिए ठहरने, भोजन एवं सुविधा की व्यवस्था।
  5. संस्थान की सम्पत्ति एवं धन का पारदर्शी एवं ईमानदार प्रबन्धन।
  6. धार्मिक, सांस्कृतिक एवं लोक-कल्याणकारी कार्य। [सुझाव]

धारा 3 — सदस्यता

3.1 सदस्यों के प्रकार

प्रकार विवरण
साधारण सदस्य 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी श्रद्धालु, जो पंजीकरण कराए और वार्षिक शुल्क दे। मतदान का अधिकार रहेगा।
आजीवन सदस्य एकमुश्त शुल्क देने वाले सदस्य। मतदान का अधिकार रहेगा। [सुझाव]
संरक्षक विशेष योगदान देने वाले वरिष्ठ व्यक्ति; सलाहकारी भूमिका, मतदान का अधिकार केवल यदि वे साधारण सदस्य भी हों। [सुझाव]

3.2 पंजीकरण (फ़ोन आधारित)

  1. सदस्य बनने के लिए व्यक्ति अपना नाम, पिता/पति का नाम, पता, आयु एवं मोबाइल नम्बर देकर पंजीकरण करेगा।
  2. पंजीकरण वेबसाइट/ऑनलाइन फ़ॉर्म, व्हाट्सऐप नम्बर, अथवा मन्दिर कार्यालय में किया जा सकेगा। [सुझाव]
  3. मोबाइल नम्बर का सत्यापन OTP अथवा कॉल-बैक द्वारा किया जाएगा। एक मोबाइल नम्बर पर एक ही सदस्य पंजीकृत होगा। [सुझाव]
  4. सदस्यता शुल्क केवल रसीद के साथ (धारा 9 के अनुसार) लिया जाएगा। साधारण सदस्यता शुल्क ₹___ वार्षिक [सुझाव: ₹101], आजीवन ₹___ [सुझाव: ₹1,100]।
  5. आवेदन पर कार्यकारिणी समिति 30 दिन के भीतर निर्णय लेगी; अस्वीकृति का कारण लिखित में बताया जाएगा। [सुझाव]
  6. सदस्यता रजिस्टर (डिजिटल एवं लिखित) सचिव के पास रहेगा। सदस्यों की सूची (नाम व गाँव; मोबाइल नम्बर नहीं) सदस्यों के देखने के लिए उपलब्ध रहेगी।
  7. मतदान के लिए वही सदस्य पात्र होगा जिसकी सदस्यता चुनाव की तिथि से कम से कम 6 माह पहले की हो और शुल्क जमा हो। [सुझाव]

3.3 सदस्यता की समाप्ति (पुराने विधान से, संशोधित)

  1. मृत्यु या लिखित त्याग पत्र।
  2. लगातार दो वर्ष तक शुल्क न देने पर (सूचना देने के बाद)। [सुझाव]
  3. संस्थान के नियमों का गम्भीर उल्लंघन, या ऐसा कार्य जो संस्थान के उद्देश्यों के विपरीत हो या उसकी प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाए।
  4. संस्थान के धन/सम्पत्ति का दुरुपयोग सिद्ध होने पर।
  5. बिन्दु 3 व 4 में सदस्यता समाप्ति से पहले सम्बन्धित सदस्य को लिखित नोटिस एवं अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा; निर्णय कार्यकारिणी के 2/3 बहुमत से होगा, जिसके विरुद्ध साधारण सभा में अपील की जा सकेगी।

धारा 4 — साधारण सभा

  1. सभी मतदान-योग्य सदस्य मिलकर साधारण सभा बनाएँगे। यह संस्थान की सर्वोच्च संस्था होगी।
  2. वार्षिक बैठक वर्ष में कम से कम एक बार [सुझाव: शारदीय नवरात्रि से पहले] होगी।
  3. बैठक की सूचना कम से कम 15 दिन पहले मन्दिर सूचना-पट, व्हाट्सऐप/SMS एवं वेबसाइट पर दी जाएगी। [सुझाव]
  4. कोरम: कुल सदस्यों का 1/5 [सुझाव]। कोरम न होने पर बैठक स्थगित होकर आधे घण्टे बाद उसी स्थान पर होगी, जिसमें कोरम आवश्यक नहीं होगा (पर विधान संशोधन/अविश्वास/विघटन ऐसी बैठक में नहीं होगा)।
  5. विशेष बैठक: अध्यक्ष, कार्यकारिणी के बहुमत, या कुल सदस्यों के 1/5 के लिखित अनुरोध पर 21 दिन के भीतर बुलाई जाएगी। [सुझाव]

साधारण सभा के कार्य: 1. हर तीन वर्ष पर कार्यकारिणी व पदाधिकारियों का चुनाव (धारा 6)। 2. वार्षिक बजट एवं वार्षिक कार्यक्रम की स्वीकृति। 3. वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट एवं आय-व्यय की स्वीकृति। 4. ₹___ [सुझाव: ₹1,00,000] से अधिक के किसी एकल व्यय या निर्माण कार्य की स्वीकृति। 5. अविश्वास प्रस्ताव, विधान संशोधन एवं विघटन पर निर्णय। 6. सदस्यता समाप्ति के विरुद्ध अपील की सुनवाई।


धारा 5 — कार्यकारिणी समिति एवं पदाधिकारी

5.1 गठन — कार्यकारिणी समिति में कुल 11 सदस्य होंगे [सुझाव: 11 या 15]:

पद संख्या
अध्यक्ष 1
उपाध्यक्ष 1
सचिव (सचिव) 1
संयुक्त सचिव 1
कोषाध्यक्ष 1
कार्यकारिणी सदस्य 6
पुजारी परिवार प्रतिनिधि (पदेन, मतदान सहित) 1 [सुझाव — कुल संख्या के अतिरिक्त]

कम से कम 2 स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। [सुझाव]

5.2 कार्यकाल एवं कार्यकाल सीमा 1. कार्यकारिणी का कार्यकाल 3 वर्ष होगा। 2. कोई व्यक्ति एक ही पद (अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष) पर लगातार दो कार्यकाल से अधिक नहीं रहेगा; एक कार्यकाल का अन्तराल देकर पुनः चुनाव लड़ सकेगा। [सुझाव] 3. कोषाध्यक्ष के लिए यह सीमा अनिवार्य रहेगी। [सुझाव] 4. बीच में पद रिक्त होने पर कार्यकारिणी शेष कार्यकाल के लिए किसी साधारण सदस्य को सहयोजित करेगी, जिसकी पुष्टि अगली साधारण सभा करेगी।

5.3 बैठक — कार्यकारिणी की बैठक कम से कम हर 2 माह में एक बार [सुझाव]; कोरम 6 सदस्य [सुझाव]; निर्णय बहुमत से, बराबर मत होने पर अध्यक्ष का निर्णायक मत। सभी बैठकों की कार्यवाही लिखी जाएगी और उसका सारांश 15 दिन में सदस्यों को उपलब्ध कराया जाएगा। [सुझाव]

5.4 पदाधिकारियों के कार्य

  • अध्यक्ष: सभी बैठकों की अध्यक्षता; संस्थान का प्रतिनिधित्व; उपसमितियों के कार्य की समीक्षा।
  • उपाध्यक्ष: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उनके कार्य।
  • सचिव (सचिव): बैठक बुलाना, कार्यवाही लिखना, अभिलेख रखना, पत्राचार, सदस्यता रजिस्टर; संस्थान की ओर से कानूनी कार्यवाही (पुराने विधान अनुसार)। ₹___ [सुझाव: ₹10,000] तक के व्यय की स्वीकृति।
  • संयुक्त सचिव: सचिव के कार्य में सहयोग एवं उनकी अनुपस्थिति में उनके कार्य।
  • कोषाध्यक्ष: (पुराने विधान का क्रम बनाए रखते हुए)
  • सभी प्राप्तियों की रसीद जारी करवाना एवं नकद धन 3 कार्य दिवस के भीतर बैंक में जमा करना। [सुझाव: पुराने विधान में 3–5 दिन]
  • कैशबुक, लेजर, वाउचर फ़ाइल एवं ऑनलाइन लेजर (धारा 9.5) अद्यतन रखना।
  • केवल स्वीकृत बिलों का भुगतान, यथासम्भव बैंक/UPI से।
  • चल सम्पत्ति एवं स्टॉक पंजिका का रख-रखाव।
  • मासिक आय-व्यय विवरण कार्यकारिणी के समक्ष रखना।
  • दैनिक व्यय हेतु अधिकतम ₹___ [सुझाव: ₹5,000] नकद अग्रिम अपने पास रख सकेगा, जिसका हिसाब हर माह देगा।

धारा 6 — चुनाव

  1. कार्यकारिणी एवं सभी पदाधिकारियों का चुनाव हर 3 वर्ष पर साधारण सभा द्वारा होगा।
  2. चुनाव गुप्त मतदान (मतपत्र द्वारा) से होगा। केवल एक पद के लिए एक ही प्रत्याशी हो तो उसे निर्विरोध घोषित किया जाएगा।
  3. चुनाव से 45 दिन पहले कार्यकारिणी एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करेगी, जो संस्थान का पदाधिकारी या प्रत्याशी नहीं होगा [सुझाव: कोई सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक/अधिकारी]।
  4. निर्वाचन अधिकारी निम्न समय-सारिणी घोषित करेगा [सुझाव]:
  5. मतदाता सूची का प्रकाशन — चुनाव से 30 दिन पहले; आपत्ति हेतु 7 दिन।
  6. नामांकन, जाँच व नाम वापसी — चुनाव से 15 से 7 दिन पहले।
  7. मतदान एवं उसी दिन सबके सामने मतगणना।
  8. प्रत्याशी के लिए कम से कम 1 वर्ष पुरानी सदस्यता आवश्यक होगी। [सुझाव]
  9. मतदाता पहचान के लिए पंजीकृत मोबाइल नम्बर/फ़ोटो पहचान पत्र दिखाना होगा। प्रॉक्सी मतदान नहीं होगा।
  10. मतगणना के समय प्रत्येक प्रत्याशी का एक प्रतिनिधि उपस्थित रह सकेगा; परिणाम उसी दिन घोषित होगा और मतपत्र 6 माह तक सील करके रखे जाएँगे। [सुझाव]
  11. चुनाव सम्बन्धी आपत्ति परिणाम से 15 दिन के भीतर धारा 13 के अनुसार उठाई जा सकेगी।

धारा 7 — उपसमितियाँ / प्रकोष्ठ

  1. कार्यकारिणी निम्न उपसमितियाँ बनाएगी। प्रत्येक में एक संयोजक (कार्यकारिणी सदस्य) एवं 3–5 साधारण सदस्य होंगे। [सुझाव]
  2. उपसमितियाँ कार्यकारिणी के अधीन रहेंगी, उसे रिपोर्ट करेंगी, और स्वीकृत बजट से बाहर व्यय नहीं कर सकेंगी।
उपसमिति मुख्य कार्य
वित्त उपसमिति बजट बनाना, मासिक हिसाब की जाँच, दान-पेटिका खोलने की व्यवस्था, ऑनलाइन लेजर की निगरानी, ऑडिट की तैयारी। कोषाध्यक्ष इसका सदस्य होगा पर संयोजक नहीं। [सुझाव]
निर्माण उपसमिति निर्माण/मरम्मत का प्रस्ताव, अनुमान (एस्टीमेट), कम से कम 3 कोटेशन लेना, कार्य की गुणवत्ता की जाँच, सामग्री का स्टॉक रिकॉर्ड।
सुरक्षा उपसमिति मेला/नवरात्रि में भीड़ प्रबन्धन, CCTV, स्वयंसेवक, पुलिस/प्रशासन से समन्वय, अग्नि सुरक्षा, खोया-पाया।
मीडिया एवं सोशल मीडिया उपसमिति वेबसाइट, फ़ेसबुक/यूट्यूब/व्हाट्सऐप चैनल, सूचनाएँ, ऑनलाइन लेजर का प्रकाशन, आरती का प्रसारण। केवल कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत आधिकारिक सूचना ही जारी करेगी।
उत्सव एवं भण्डारा उपसमिति नवरात्रि, मेला, भण्डारा, जागरण आदि का आयोजन; राशन/सामग्री का हिसाब; मेला दुकानों का आवंटन एवं शुल्क (रसीद सहित)।
स्वच्छता उपसमिति मन्दिर एवं परिसर की दैनिक सफाई, शौचालय, पेयजल, कचरा निस्तारण, प्लास्टिक-मुक्त परिसर, वार्षिक रंगाई-पुताई।

धारा 8 — पुजारी परिवार की भूमिका

  1. मन्दिर में पारम्परिक रूप से सेवा करने वाले पुजारी परिवार का धार्मिक अधिकार एवं सम्मान बना रहेगा — नित्य पूजा, आरती, भोग, अनुष्ठान, संस्कार एवं धार्मिक विधि-विधान का निर्णय पुजारी परिवार करेगा।
  2. पुजारी परिवार का एक प्रतिनिधि कार्यकारिणी में पदेन सदस्य रहेगा। [सुझाव]
  3. पुजारी परिवार संस्थान/समिति के अधीन कार्य करेगा: मन्दिर की सम्पत्ति, दान, चढ़ावा, भवन, निर्माण, भूमि एवं प्रशासनिक निर्णय केवल कार्यकारिणी/साधारण सभा के अधिकार में रहेंगे।
  4. गर्भगृह/मूर्ति पर चढ़ाया गया नकद एवं बहुमूल्य वस्तुएँ (सोना, चाँदी, वस्त्र आदि) संस्थान की सम्पत्ति होंगी और धारा 9 के अनुसार दर्ज होंगी। फूल, प्रसाद आदि नाशवान वस्तुओं के विषय में व्यवस्था कार्यकारिणी तय करेगी। [सुझाव — यह विषय संवेदनशील है, पुजारी परिवार से चर्चा करके तय करें]
  5. पुजारी परिवार/पुजारी को मासिक मानदेय (दक्षिणा) दिया जाएगा, जो साधारण सभा तय करेगी (पुराने विधान अनुसार)। [सुझाव: यजमान द्वारा व्यक्तिगत रूप से दी गई अनुष्ठान-दक्षिणा पुजारी की रहेगी]
  6. पूजा का समय, पूजा शुल्क (यदि कोई हो) की सूची कार्यकारिणी एवं पुजारी परिवार मिलकर तय करेंगे और सूचना-पट पर लगाएँगे; हर शुल्क की रसीद मिलेगी। [सुझाव]
  7. पुजारी परिवार का कोई सदस्य साधारण सदस्य बन सकता है, पर कोषाध्यक्ष पद पर नहीं रहेगा। [सुझाव — हित-टकराव से बचने के लिए]

धारा 9 — वित्तीय पारदर्शिता

9.1 मूल नियम: संस्थान को मिलने वाला हर दान, शुल्क एवं आय रसीद के साथ ही लिया जाएगा। बिना रसीद का कोई लेन-देन संस्थान का नहीं माना जाएगा। कोई भी पदाधिकारी/पुजारी व्यक्तिगत खाते/UPI में संस्थान का धन नहीं लेगा।

9.2 दान प्राप्ति के मान्य तरीके

  1. वेबसाइट/ऑनलाइन: संस्थान की वेबसाइट पर ऑनलाइन दान, जिसकी स्वचालित ई-रसीद (SMS/ईमेल/व्हाट्सऐप) मिलेगी।
  2. UPI QR कोड: केवल वही QR कोड लगेगा जो मन्दिर के बैंक खाते से जुड़ा हो (QR पर खाते का नाम “श्री दुर्गा शक्ति पीठ संस्थान” दिखे)। परिसर में लगे सभी QR कोड की सूची वेबसाइट पर रहेगी; हर माह सुरक्षा/वित्त उपसमिति जाँच करेगी कि कोई नकली QR न लगा हो। [सुझाव]
  3. काउंटर पर नकद/चेक: क्रमांकित रसीद बुक या डिजिटल रसीद से। रसीद बुक सचिव जारी करेगा और उसका रजिस्टर रखेगा।
  4. दान पेटिका (दान पात्र):
  5. सभी पेटिकाओं पर दो ताले होंगे; चाबियाँ अलग-अलग दो पदाधिकारियों के पास रहेंगी [सुझाव: कोषाध्यक्ष एवं सचिव]।
  6. पेटिका निर्धारित तिथि पर [सुझाव: हर माह, और नवरात्रि/मेला के बाद] खोली जाएगी।
  7. खोलते समय कम से कम 3 गवाह उपस्थित रहेंगे, जिनमें कम से कम 1 ऐसा साधारण सदस्य हो जो पदाधिकारी न हो। [सुझाव]
  8. खोलने और गिनने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जो कम से कम 3 वर्ष तक सुरक्षित रखी जाएगी।
  9. गिनती का विवरण-पत्र (मूल्यवर्ग अनुसार) तीनों गवाह व कोषाध्यक्ष हस्ताक्षर करेंगे, और राशि उसी दिन या अगले कार्य दिवस पर बैंक में जमा होगी।
  10. वस्तु-दान (अन्न, वस्त्र, सोना-चाँदी, सामग्री आदि): हर वस्तु-दान की रसीद दी जाएगी जिसमें वस्तु का विवरण, मात्रा और अनुमानित मूल्य लिखा होगा। यह स्टॉक पंजिका एवं ऑनलाइन लेजर में दर्ज होगा। सोना-चाँदी का वजन व मूल्यांकन दो गवाहों के सामने होगा और वह बैंक लॉकर में रखा जाएगा। [सुझाव]
  11. मेला दुकान शुल्क/किराया भी रसीद पर ही लिया जाएगा।

9.3 बैंक खाता एवं संचालन 1. संस्थान का समस्त धन संस्थान के नाम से खुले बैंक खाते(खातों) में रहेगा। 2. बैंक खाते का संचालन दो संयुक्त हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा होगा — कोषाध्यक्ष एवं [अध्यक्ष या सचिव में से कोई एक] [सुझाव]। नेट-बैंकिंग में भी “मेकर-चेकर” (दो व्यक्तियों की स्वीकृति) व्यवस्था रहेगी। 3. ₹___ [सुझाव: ₹2,000] से अधिक के सभी भुगतान बैंक/UPI/चेक से होंगे, नकद से नहीं। 4. हर भुगतान के साथ बिल/वाउचर और स्वीकृति का हवाला रहेगा। 5. स्थायी निधि (कॉर्पस): पुराने विधान की भावना के अनुसार एक स्थायी जमा (FD) बनाई जाएगी, जिसके ब्याज से पुजारी मानदेय/नित्य पूजा का व्यय चले। इसका मूलधन केवल साधारण सभा के 2/3 बहुमत से ही निकाला जा सकेगा। [सुझाव]

9.4 व्यय स्वीकृति सीमा [सुझाव — राशियाँ समिति तय करे]

राशि स्वीकृति
₹10,000 तक सचिव या अध्यक्ष
₹10,001 – ₹1,00,000 कार्यकारिणी समिति (बैठक में)
₹1,00,000 से अधिक / कोई भी नया निर्माण साधारण सभा
₹25,000 से अधिक की खरीद/ठेका कम से कम 3 कोटेशन अनिवार्य

9.5 सार्वजनिक ऑनलाइन लेजर 1. संस्थान की सभी आय (दान दाता का नाम केवल उसकी सहमति से, अन्यथा “गुप्त दान”) एवं सभी व्यय हर माह की 10 तारीख तक वेबसाइट/सार्वजनिक पेज पर प्रकाशित होंगे। [सुझाव] 2. दान पेटिका की गिनती का विवरण, वस्तु-दान एवं बैंक शेष भी इसमें दिखाए जाएँगे। 3. मासिक सारांश मन्दिर के सूचना-पट पर भी लगाया जाएगा (जिनके पास इंटरनेट नहीं है उनके लिए)। 4. कोई भी सदस्य लिखित अनुरोध पर 15 दिन के भीतर किसी भी बिल/वाउचर की प्रति देख सकेगा।

9.6 ऑडिट 1. हर वित्तीय वर्ष के अन्त में चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा वार्षिक ऑडिट होगा, जिसे साधारण सभा नियुक्त करेगी। एक ही CA लगातार 3 वर्ष से अधिक नहीं रहेगा। [सुझाव] 2. इसके अतिरिक्त छमाही आन्तरिक जाँच (पुराने विधान की “वर्ष में दो बार” व्यवस्था) वित्त उपसमिति/आन्तरिक सम्प्रेक्षक द्वारा होगी। 3. ऑडिट रिपोर्ट, आपत्तियों एवं उनके सुधार सहित, साधारण सभा में स्वीकृति हेतु रखी जाएगी और वेबसाइट पर प्रकाशित होगी। 4. ऑडिटर को नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिले तो वह तत्काल अध्यक्ष एवं संरक्षक मण्डल को लिखित सूचना देगा (पुराने विधान अनुसार)। 5. आयकर (12A/80G आदि) एवं रजिस्ट्रार को वार्षिक विवरण समय से जमा होंगे। [सुझाव]


धारा 10 — हितों का टकराव (Conflict of Interest)

  1. कोई पदाधिकारी, उपसमिति सदस्य या उनके परिवार का सदस्य (पति/पत्नी, माता-पिता, सन्तान, भाई-बहन) संस्थान को सामान/सेवा/ठेका दे रहा हो या उसमें उसका आर्थिक हित हो, तो वह इसकी लिखित घोषणा करेगा और उस निर्णय की चर्चा व मतदान से अलग रहेगा।
  2. ऐसे किसी ठेके/खरीद के लिए 3 कोटेशन अनिवार्य होंगे और निर्णय कार्यवाही पुस्तिका में कारण सहित लिखा जाएगा।
  3. एक ही परिवार के दो सदस्य एक साथ अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो पदों पर नहीं रहेंगे; बैंक के दोनों संयुक्त हस्ताक्षरकर्ता एक ही परिवार के नहीं होंगे।
  4. कोई पदाधिकारी संस्थान की सम्पत्ति/भूमि/दुकान व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग नहीं करेगा।
  5. हर पदाधिकारी पद ग्रहण के समय एवं हर वर्ष हित-घोषणा पत्र भरेगा। [सुझाव]
  6. घोषणा छिपाना धारा 3.3 एवं धारा 11 के अन्तर्गत कार्यवाही का आधार होगा।

धारा 11 — पद से हटाना एवं अविश्वास प्रस्ताव

  1. कोई पदाधिकारी या कार्यकारिणी सदस्य निम्न स्थितियों में हटाया जा सकेगा: धन/सम्पत्ति का दुरुपयोग, विधान का गम्भीर उल्लंघन, लगातार 3 बैठकों में बिना सूचना अनुपस्थिति (पुराने विधान से), हित-टकराव छिपाना, या किसी नैतिक अपराध में दोषसिद्धि।
  2. अविश्वास प्रस्ताव — कुल मतदान-योग्य सदस्यों के कम से कम 1/5 [सुझाव] के हस्ताक्षर से, कारण सहित, सचिव (या सचिव के विरुद्ध हो तो अध्यक्ष) को दिया जाएगा।
  3. 21 दिन के भीतर साधारण सभा की विशेष बैठक बुलाई जाएगी; न बुलाए जाने पर प्रस्तावक स्वयं निर्वाचन अधिकारी/संरक्षक के माध्यम से बैठक बुला सकेंगे। [सुझाव]
  4. सम्बन्धित पदाधिकारी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
  5. प्रस्ताव उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से, गुप्त मतदान द्वारा, पारित होने पर पदाधिकारी तुरन्त पद से हट जाएगा। [सुझाव]
  6. एक ही पदाधिकारी के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव 6 माह में एक बार से अधिक नहीं लाया जा सकेगा। [सुझाव]
  7. हटाए गए पदाधिकारी को 7 दिन के भीतर सभी अभिलेख, चाबियाँ, रसीद बुक, पासवर्ड एवं संस्थान की सम्पत्ति सौंपनी होगी।
  8. धन के दुरुपयोग की स्थिति में संस्थान वसूली एवं कानूनी कार्यवाही कर सकेगा।

धारा 12 — अभिलेख

निम्न अभिलेख (लिखित एवं जहाँ सम्भव डिजिटल) अवश्य रखे जाएँगे (पुराने विधान की सूची, विस्तारित):

  1. सदस्यता रजिस्टर (मोबाइल नम्बर सहित)
  2. कार्यवाही पुस्तिका (साधारण सभा, कार्यकारिणी, उपसमितियाँ)
  3. आय-व्यय रजिस्टर (कैशबुक), लेजर, वाउचर फ़ाइल
  4. स्टॉक पंजिका (वस्तु-दान सहित)
  5. निरीक्षण एवं सुझाव पुस्तिका
  6. पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों की सूची
  7. रसीद बुक रजिस्टर (कौन-सी बुक किसे जारी हुई)
  8. दान पेटिका गिनती रजिस्टर एवं वीडियो रिकॉर्डिंग
  9. सम्पत्ति रजिस्टर (भूमि, भवन, आभूषण, उपकरण)
  10. हित-घोषणा पत्र
  11. ऑडिट रिपोर्ट एवं बैंक विवरण

अभिलेख कम से कम 8 वर्ष तक सुरक्षित रखे जाएँगे। [सुझाव]


धारा 13 — विवाद निवारण

  1. संस्थान से जुड़ा कोई भी विवाद पहले लिखित शिकायत के रूप में सचिव/अध्यक्ष को दिया जाएगा; 30 दिन में कार्यकारिणी निर्णय देगी। [सुझाव]
  2. असन्तुष्ट होने पर मामला 3 सदस्यीय विवाद निवारण/पंच समिति को जाएगा, जिसे साधारण सभा 3 वर्ष के लिए चुनेगी; इसके सदस्य पदाधिकारी नहीं होंगे [सुझाव: संरक्षक मण्डल से या सम्मानित निष्पक्ष व्यक्ति]। यह 45 दिन में निर्णय देगी।
  3. इसके बाद भी विवाद रहने पर अगली साधारण सभा अन्तिम आन्तरिक निर्णय लेगी।
  4. आन्तरिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई सदस्य रजिस्ट्रार या न्यायालय जाएगा (विधिक अधिकार इससे सीमित नहीं होते)।
  5. धार्मिक विधि-विधान से जुड़े विवाद में पुजारी परिवार एवं किसी विद्वान आचार्य की राय ली जाएगी। [सुझाव]
  6. न्यायिक क्षेत्र: जनपद देवरिया (पुराने विधान अनुसार)।
  7. कानूनी उत्तरदायित्व: संस्थान द्वारा या उसके विरुद्ध सभी मुकदमों में संस्थान की ओर से सचिव कार्यवाही करेगा (पुराने विधान अनुसार), कार्यकारिणी की स्वीकृति से।

धारा 14 — विधान में संशोधन

  1. इस विधान में संशोधन केवल साधारण सभा द्वारा, उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से होगा। [सुझाव: साथ में कोरम कुल सदस्यों का कम से कम 1/3 रहे]
  2. संशोधन का प्रस्ताव लिखित रूप में, बैठक से कम से कम 21 दिन पहले सभी सदस्यों को (सूचना-पट, व्हाट्सऐप/SMS, वेबसाइट) भेजा जाएगा।
  3. धारा 2 (धार्मिक उद्देश्य) एवं धारा 8.1 (पुजारी परिवार का धार्मिक अधिकार) में संशोधन हेतु अतिरिक्त रूप से पुजारी परिवार प्रतिनिधि की राय ली जाएगी। [सुझाव]
  4. संशोधन रजिस्ट्रार के यहाँ पंजीकृत होने के बाद लागू होगा।

धारा 15 — विघटन

  1. संस्थान का विघटन साधारण सभा के कुल सदस्यों के 3/5 बहुमत से ही हो सकेगा (पुराने विधान अनुसार)।
  2. विघटन की स्थिति में सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 की धारा 13 व 14 के अनुसार कार्यवाही होगी।
  3. देनदारी चुकाने के बाद शेष सम्पत्ति किसी सदस्य में नहीं बँटेगी; वह समान उद्देश्य वाली किसी पंजीकृत धार्मिक/धर्मार्थ संस्था को दी जाएगी, और मन्दिर की मूर्तियाँ/पूजा व्यवस्था निरन्तर चलती रहेगी।

धारा 16 — संक्रमणकालीन व्यवस्था [सुझाव]

  1. यह विधान स्वीकार होने के 90 दिन के भीतर फ़ोन-आधारित सदस्यता पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा।
  2. उसके बाद 90 दिन के भीतर इस विधान के अनुसार पहला चुनाव होगा; तब तक वर्तमान समिति केवल दैनिक कार्य देखेगी, कोई बड़ा नया व्यय/निर्माण नहीं करेगी।
  3. पहले चुनाव से पहले नया बैंक संचालन (दो हस्ताक्षर), UPI QR बदलना एवं ऑनलाइन लेजर शुरू कर दिया जाएगा।

प्रारूप तैयार: अक्टूबर 2026 — साधारण सभा की स्वीकृति हेतु।